बिहार परिवहन विभाग द्वारा बस कंडक्टर लाइसेंस की योग्यता में किए गए बदलावों की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है। यह निर्णय राज्य में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और ड्राइवर-कंडक्टर की योग्यता में समानता लाने के लिए लिया गया है।




1. योग्यता में मुख्य बदलाव

पहले बिहार में कंडक्टर लाइसेंस के लिए मैट्रिक (10वीं) पास होना अनिवार्य था, जबकि ड्राइवर के लिए 8वीं पास। इस विसंगति को दूर करने के लिए अब दोनों की योग्यता एक समान कर दी गई है।

  • नई शैक्षणिक योग्यता: किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल से 8वीं कक्षा उत्तीर्ण
  • प्रभावी तिथि: यह नियम 28 जनवरी, 2026 से पूरे राज्य में लागू हो गया है।
  • नियम में संशोधन: यह बदलाव बिहार मोटरगाड़ी नियमावली, 1992 में संशोधन के माध्यम से किया गया है।

2. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

कंडक्टर लाइसेंस (Conductor License) के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

दस्तावेज का प्रकारविवरण
शिक्षा प्रमाण पत्र8वीं कक्षा का पास सर्टिफिकेट या मार्कशीट।
पहचान प्रमाणआधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी।
निवास प्रमाणआधार कार्ड, राशन कार्ड, या बिजली बिल।
आयु प्रमाणजन्म प्रमाण पत्र या स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (SLC)।
चिकित्सा प्रमाण पत्रफॉर्म 1 या 1A (सरकारी डॉक्टर द्वारा प्रमाणित)।
फर्स्ट एड सर्टिफिकेटसेंट जॉन एम्बुलेंस एसोसिएशन या अधिकृत संस्थान द्वारा जारी।
फोटो2-3 हालिया पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।

3. आवेदन कैसे करें? (Online Process)

अब आप घर बैठे सारथी (Sarathi) पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट: parivahan.gov.in पर जाएं।
  2. राज्य चुनें: ड्रॉपडाउन मेनू से 'Bihar' का चयन करें।
  3. सेवा का चयन: 'Conductor License' मेनू में जाकर 'New Conductor License' पर क्लिक करें।
  4. विवरण भरें: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और शैक्षणिक योग्यता (अब 8वीं पास चुनें) भरें।
  5. दस्तावेज अपलोड: ऊपर बताए गए दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
  6. फीस भुगतान: निर्धारित आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें और रसीद प्रिंट कर लें।

4. इस बदलाव के पीछे का कारण

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस की तुलना में कंडक्टर लाइसेंस कम जारी हो रहे थे। इसका मुख्य कारण कंडक्टर के लिए 10वीं पास की अनिवार्य शर्त थी। अब योग्यता कम होने से:

  • आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  • परिवहन सेवाओं में कंडक्टरों की कमी दूर होगी।
  • पिंक बसों (Pink Buses) के लिए महिला कंडक्टरों की भर्ती में भी आसानी होगी।

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