शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षक नियोजन (Primary Teacher Recruitment) को लेकर लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
मुख्य निर्णय (Key Decision)
बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य में प्रारंभिक शिक्षकों की बहाली के लिए BTET (Bihar Teacher Eligibility Test) का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर केवल CTET (Central Teacher Eligibility Test) के अंकों और पात्रता को ही अनिवार्य माना जाएगा।
विस्तृत विवरण:
- BTET को क्यों रोका गया?
- शिक्षा विभाग का तर्क है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष नियमित रूप से CTET का आयोजन किया जाता है।
- चूंकि CTET के प्रमाण पत्र राज्य में भी मान्य हैं, इसलिए अलग से राज्य पात्रता परीक्षा (BTET) आयोजित करने की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है।
- सरकार का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।
- CTET की अनिवार्यता:
- प्रारंभिक स्कूलों (कक्षा 1 से 8) में शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए अब CTET पास करना अनिवार्य होगा।
- बिहार के अभ्यर्थियों को अब इसी केंद्रीय परीक्षा पर निर्भर रहना होगा।
- पुरानी पात्रता का क्या होगा?
- जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में आयोजित BTET परीक्षा उत्तीर्ण की है और उनके प्रमाण पत्र की वैधता बची हुई है, वे भविष्य की बहालियों में आवेदन करने के पात्र बने रहेंगे।
- यह निर्णय नई परीक्षाओं के आयोजन को रोकने के लिए है, पुरानी डिग्री को अमान्य करने के लिए नहीं।
- STET पर प्रभाव:
- ध्यान रहे कि यह फैसला केवल प्रारंभिक शिक्षकों (Primary Teachers) के लिए है।
- माध्यमिक (Secondary) और उच्च माध्यमिक (Higher Secondary) शिक्षकों के लिए होने वाली STET (State Teacher Eligibility Test) परीक्षा पर इसका असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि केंद्र सरकार माध्यमिक स्तर के लिए CTET का आयोजन नहीं करती है।
- छात्रों पर प्रभाव:
- इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है जो विशेष रूप से बिहार टीईटी (BTET) की तैयारी कर रहे थे और जिनका CTET क्लियर नहीं हो पाया था।
- अब अभ्यर्थियों को साल में दो बार होने वाली CTET परीक्षा पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा।
यह निर्णय बिहार में शिक्षक बहाली प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और राष्ट्रीय स्तर के मानकों (CTET) को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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